एनवीडिया (NASDAQ:NVDA) ने शेयर बाजार में एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है जो पहले कभी किसी सार्वजनिक कंपनी ने नहीं देखा था। कंपनी का मार्केट कैप अब 5.3 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच गया है। हाल ही में इसके शेयर 4% की बढ़त के साथ 216.61 डॉलर के नए उच्चतम स्तर पर बंद हुए, जिसने पिछले साल के 212 डॉलर के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। देखा जाए तो पिछले पांच सालों में इस दिग्गज चिपमेकर कंपनी के शेयरों में लगभग 1300% का जबरदस्त उछाल आया है। यह 2021 के बाद से करीब 14 गुना की बढ़ोतरी है।
इस शानदार तेजी के साथ एनवीडिया ने दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। उसने अल्फाबेट (करीब 4.2 ट्रिलियन डॉलर) और एप्पल (करीब 3.9 ट्रिलियन डॉलर) को काफी पीछे छोड़ दिया है। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट (3.15 ट्रिलियन डॉलर), अमेज़न (2.8 ट्रिलियन डॉलर), टीएसएमसी (2.1 ट्रिलियन डॉलर) और ब्रॉडकॉम (1.98 ट्रिलियन डॉलर) का नंबर आता है। टॉप 10 की सूची में सऊदी अरामको (1.75 ट्रिलियन), मेटा (1.72 ट्रिलियन) और टेस्ला (1.42 ट्रिलियन) भी शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि बाजार मूल्य के हिसाब से दुनिया की शीर्ष दस में से नौ कंपनियां टेक्नोलॉजी सेक्टर की ही हैं। बाजार के जानकारों का रुख भी कंपनी को लेकर बेहद सकारात्मक बना हुआ है। पिछले तीन महीनों में विश्लेषकों ने 40 ‘बाय’ रेटिंग दी हैं, साथ ही एक ‘होल्ड’ और एक ‘सेल’ रेटिंग भी मिली है। औसतन 274.38 डॉलर का टारगेट प्राइस तय किया गया है, जिसका सीधा मतलब है कि अभी भी इसमें करीब 26% की और तेजी आने की संभावना है।
सेमीकंडक्टर सेक्टर में चौतरफा उछाल यह तेजी सिर्फ एनवीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सेमीकंडक्टर सेक्टर में एक भारी उछाल देखने को मिल रहा है। डेटा सेंटर और एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते खर्च की उम्मीदों ने इस रैली को रफ्तार दी है। पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो ब्रॉडकॉम 39%, माइक्रोन टेक्नोलॉजी 47%, एएमडी 65%, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स 41% और इंटेल 97% तक चढ़े हैं। खास तौर पर इंटेल ने शानदार वापसी की है। मार्च के अंत से इसके मूल्य में दोगुना इजाफा हुआ है और पिछले एक साल में इसमें 323% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एनवीडिया के भविष्य को लेकर विश्लेषक काफी आश्वस्त हैं। उनका मानना है कि कंपनी का इंडस्ट्रियल एआई इकोसिस्टम में निवेश का मौजूदा दौर खत्म होने के बाद शेयरधारकों को जबरदस्त रिटर्न मिलेगा। हाल के महीनों में एनवीडिया ने इस इकोसिस्टम में 80 बिलियन डॉलर से ज्यादा का भारी-भरकम निवेश किया है। इसमें इंटेल, नोकिया, ओपनएआई, एंथ्रोपिक, एक्सएआई, सिनोप्सिस, रिवोल्यूट, वेव, एनस्केल, ल्यूमेंटम होल्डिंग्स और कोहेरेंट समेत कई कंपनियों के साथ की गई साझेदारियां शामिल हैं। बैंक ऑफ अमेरिका का तो यहां तक अनुमान है कि जेन्सेन हुआंग की अगुवाई वाला यह ग्रुप 2026 और 2027 के बीच 400 बिलियन डॉलर से ज्यादा का फ्री कैश फ्लो जनरेट कर सकता है। इसके साथ ही बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश की एक नई लहर भी चल रही है। अल्फाबेट और अमेज़न द्वारा एंथ्रोपिक में बड़ा निवेश और स्पेसएक्स द्वारा 60 बिलियन डॉलर में ‘कर्सर’ के संभावित अधिग्रहण की खबरें इसी ट्रेंड का हिस्सा हैं।
क्या खतरे में है एनवीडिया का एकाधिकार? इतनी बड़ी सफलताओं के बीच कुछ गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं। क्या एनवीडिया का यह सुनहरा दौर और बाजार पर उसका एकाधिकार अब खत्म होने वाला है? आमतौर पर एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग काफी शांत रहते हैं। लेकिन द्वारकेश पटेल के पॉडकास्ट में हाल ही में उनकी एक अलग ही प्रतिक्रिया देखने को मिली। जब अपनी चिर-परिचित लेदर जैकेट में बैठे हुआंग से यह पूछा गया कि क्या गूगल के टीपीयू (TPU) एनवीडिया के वर्चस्व के लिए खतरा बन सकते हैं, तो उन्होंने इस बात का काफी तीखा विरोध किया।
चिप्स से कहीं आगे की है असली लड़ाई हुआंग का साफ तौर पर मानना था कि असली मुकाबला सिर्फ चिप्स को लेकर नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कंप्यूटिंग के भविष्य को किस तरह देखते हैं। पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने कहा कि लोगों का सारा ध्यान सिर्फ एआई पर अटका है, जो कि पूरी तस्वीर नहीं है। एक्सीलरेटेड कंप्यूटिंग का दायरा एआई से कहीं ज्यादा बड़ा और विविध है। उनका तर्क है कि एनवीडिया ने जनरल-पर्पज सिस्टम से एक्सीलरेटेड सिस्टम की ओर जो बदलाव किया है, वह उसकी पहुंच को टीपीयू या एएसआईसी (एप्लिकेशन-स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड सर्किट) जैसी तकनीकों के मुकाबले काफी आगे ले जाता है।




